Amrita Pritam- अमृता बेगम और साहिर लुधियानवी का दिलचस्प प्रेम कहानी

Amrita Pritam:सन 1982 में भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानी अमिता बेगम (Amrita Begum ) ।100 रचना के आलावा कहानियो में भी छाप छोड़ चुकी है ।उनकी कहानी नारी सवेदना ,पीड़ा ,करुणा का वर्णन किया है ।उनकी कहानी जंगली बूटी

प्रेम अलैकिक होते है ,ये दुनिया रस्मो के मोहताज नहीं होते कुछ ऐसा ही अमृता की कहानी है इश्क का मुलाकात 1942 में हुए साहिर से लुधियानवी में मिले

मुलाकात के बारे में उन्होने लिखा-
मुझे नहीं मालूम की साहिर के लफ़्हज़ों की जादूगरी थी
या खामोश नजरो का कमला लेकिन कुछ तो था
जो मुझे अपनी तरफ खींच

साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे। अमृता बेहद दिलकश। अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। दोनों एक मुशायरे में शिरकत के लिए प्रीत नगर पहुंचे थे। मद्धम रोशनी वाले एक कमरे में दोनों की आंखें चार हुईं और बस प्यार हो गया। मगर, प्यार की ये कहानी उस दिशा में चल पड़ी, जिसका न कोई ओर-छोर था न इससे पहले कोई मिसाल मिलती है।

मगर, साहिर कभी अमृता को पूरी तरह अपनाने के लिए जहनी तौर पर तैयार नहीं हो सके। उन्हें इस प्यार का मुकम्मल मुस्तकबिल नजर नहीं आता था। वो अमृता के लिए जो प्यार महसूस करते थे, उसे वो अपने कलम से तो जाहिर कर लेते थे। आखिर वो एक शायर जो ठहरे। उस दौर में साहिर तमाम सामाजिक और सियासी मसलों पर जमकर लिखा करते थे। इश्किया शायरी का नंबर बाद में आता था।

फिर भी अमृता से अपनी मोहब्बत को लेकर उन्होंने 1964 में आई फिल्म दूज का चांद में एक गीत लिखा था।।।महफिल से उठकर जाने वालो।

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